
रुकावटें दूर होना: 'बनते-बनते काम बिगड़ने' की समस्या खत्म होती है और अटके हुए कार्यों में गति आती है।
तनाव से मुक्ति: मानसिक दबाव, भ्रम और अज्ञात भय दूर होता है; आत्मविश्वास में सुधार होता है।
भाग्य और धन में वृद्धि: पीड़ित भाव (जैसे नौकरी, व्यापार या धन स्थान) बंधन से मुक्त होकर शुभ फल देने लगता है।
शत्रु और बाधाओं का नाश: दुर्गा सप्तशती के मंत्रों के प्रभाव से गुप्त शत्रुओं, नकारात्मक ऊर्जा और कोर्ट-कचहरी के विवादों से राहत मिलती है।
सही निर्णय लेने की क्षमता: शिव अभिषेक से बुद्धि स्थिर होती है, जिससे सही समय पर सही फैसले लेने का साहस आता है।
दोष क्या है : जब किसी भाव अथवा ग्रह के दोनों ओर (द्वितीय-द्वादश) पाप ग्रह स्थित हों, तब वह भाव "कैंची" में फँसकर अपने शुभ फल नहीं दे पाता — कार्यों में अवरोध एवं संकोच आता है।
शांति विधि : सामान्य पूर्वांग के पश्चात् घेरने वाले दोनों पाप ग्रहों (प्रायः शनि-मंगल या राहु-केतु) की पृथक् शांति, उनके बीज-मंत्र जप एवं हवन कराया जाता है। शिव-पंचाक्षर एवं संबंधित भाव के कारक-देवता का अभिषेक होता है। दुर्गा-सप्तशती के अवरोध-नाशक मंत्रों से आहुति दी जाती है। अनुमानित अवधि लगभग 2.5–3 घंटे।
Ganesha-Ambika Puja and Sankalp: Special Sankalp with the name and Gotra of the host.
Krur Graha Shanti: Chanting the seed mantras of both surrounding malefic planets.
Shiva Abhishek: Special Shiva Panchakshara Abhishek to break the bondages.
Badha-Mukti Havan: Special offerings with the obstacle-destroying mantras from Durga Saptashati.
Purnahuti and Daan: Donation of items related to the respective planets to remove the defects.
Estimated duration: 2.5 to 3 hours
Puja materials: Complete Puja Kit included