
विधिवत गुरु चांडाल योग शांति पूजा, बृहस्पति शांति, राहु शांति, विष्णु उपासना, गुरु मंत्र जप, नवग्रह पूजन एवं हवन से दोष शमन का विधान है। इससे ज्ञान, विवेक, भाग्योदय, शिक्षा में सफलता, संतान सुख, आर्थिक स्थिरता, मानसिक शांति तथा जीवन में सम्मान, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की वृद्धि होती है।
दोष क्या है
गुरु चांडाल योग तब बनता है जब जन्मकुंडली में बृहस्पति (गुरु) राहु या केतु के साथ युति करे अथवा उनके प्रबल प्रभाव में हो। ज्योतिष शास्त्र में गुरु ज्ञान, धर्म, विवेक, भाग्य, संतान और सदाचार का कारक माना जाता है। इस योग के कारण व्यक्ति की निर्णय क्षमता, नैतिक दृष्टिकोण और जीवन की दिशा प्रभावित हो सकती है।
लक्षण एवं परिणाम
शिक्षा में बाधा, गलत संगति, निर्णयों में भ्रम, भाग्य का कम सहयोग, विवाह या संतान सुख में विलंब, आर्थिक उतार-चढ़ाव तथा गुरुजनों से मतभेद इसके प्रमुख संकेत माने जाते हैं। कई बार व्यक्ति को सही अवसरों का लाभ लेने में कठिनाई होती है।
The Guru-Chandal Yoga Shanti Puja addresses the affliction caused by the conjunction of Guru (Jupiter) and Rahu in the birth chart, which can lead to injuries. This Vedic ritual involves the worship of Lord Ganesha and the Navagrahas (nine planets), the taking of a solemn vow (Sankalpa) related to Guru, the chanting of Rahu mantras, and the performance of specific invocations. The puja aims to mitigate obstacles in areas such as education, religious pursuits, marriage, progeny, financial progress, mental clarity, and spiritual growth, while simultaneously enhancing the auspicious influence of Guru.