
Freedom from Financial Difficulties: Sudden financial shortages and financial obstacles in life are eliminated.
Debt Relief: If you have been trapped in debt for a long time, this puja opens the path to debt relief.
Savings and Wealth Accumulation: Wastage of earned money is stopped, and bank balance and assets begin to increase.
New Income Streams: The pacification of the planets Dhanesh and Labhesh brings new opportunities for profit in business, job, and career.
Mental Peace: Relief is obtained from stress and family conflicts caused by financial insecurity.
दोष क्या है : धनेश-लाभेश के त्रिक भावों में पीड़ित होने या लग्नेश के दुर्बल होने पर बना यह योग धन-अभाव, ऋण-प्रवृत्ति एवं संचय में असमर्थता दर्शाता है।
शांति विधि : सामान्य पूर्वांग के पश्चात् माँ महालक्ष्मी एवं कुबेर का प्रधान पूजन होता है। श्री सूक्त, कनकधारा स्तोत्र एवं लक्ष्मी-अष्टोत्तर जप, धनेश-ग्रह की शांति कराई जाती है। बेल-कमलगट्टा एवं घृत से श्री सूक्त-मंत्रों द्वारा हवन; पूर्णाहुति। महालक्ष्मी-यंत्र प्रतिष्ठा एवं अन्न-दान विशेष फलप्रद। अनुमानित अवधि लगभग 2.5–3 घंटे।
सामान्य पूर्वांग पूजन: पूजा की शुरुआत स्वस्तिवाचन, गणेश-अम्बिका पूजन, कलश स्थापन, नवग्रह मंडल पूजन और संकल्प के साथ होती है।
प्रधान पूजन: मुख्य वेदी पर माँ महालक्ष्मी और भगवान कुबेर का षोडशोपचार (16 सामग्रियों से) विशेष पूजन किया जाता है।स्तोत्र पाठ एवं मंत्र जप:
ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए श्री सूक्त और कनकधारा स्तोत्र के सस्वर पाठ।
लक्ष्मी-अष्टोत्तर (108 नाम) का श्रद्धापूर्वक जप।
कुंडली में पीड़ित धनेश ग्रह की शांति के लिए विशेष मंत्रों का जाप।हवन एवं पूर्णाहुति: श्री सूक्त के दिव्य मंत्रों द्वारा बेल (बिल्वपत्र), कमलगट्टा और शुद्ध गाय के घी (घृत) की आहुतियां दी जाती हैं, जिसके बाद महा-पूर्णाहुति होती है।यंत्र प्रतिष्ठा: पूजा के दौरान सिद्ध महालक्ष्मी-यंत्र की प्राण-प्रतिष्ठा की जाती है, जिसे यजमान अपने घर या तिजोरी में रख सकते हैं।ब्राह्मण भोजन एवं अन्न-दान: पूजा की पूर्णता के लिए ब्राह्मण को सात्विक भोजन, दक्षिणा और जरूरतमंदों को अन्न-दान कराया जाता है, जो इस दोष की शांति के लिए विशेष फलदायी है।