
Child Bliss: Obstacles to conception are removed, and a healthy, long-lived child is born.
Good Health: Serious physical and mental illnesses afflicting the couple are eradicated.
Longevity (Aayu Raksha): Chanting Mahamrityunjaya prevents premature death and ensures a long life for the couple.
Marital Bliss: Disagreements and tensions are calmed, leading to a happy married life.
दोष क्या है : वर-वधू की समान नाड़ी (आदि/मध्य/अंत्य) — संतान, स्वास्थ्य एवं आयु की दृष्टि से संवेदनशील (अनेक अपवाद/भंग भी हैं)।
शांति विधि : सामान्य पूर्वांग के पश्चात् नाड़ी-दोष निवारण शांति प्रधान है — महामृत्युंजय जप, गौरी-शंकर पूजन एवं संबंधित नक्षत्र-स्वामी ग्रह की शांति कराई जाती है। परंपरा में स्वर्ण-नाग दान, सुवर्ण-दान एवं गौ-दान का विधान। पलाश समिधा से महामृत्युंजय-मंत्रों द्वारा हवन; पूर्णाहुति। अनुमानित अवधि लगभग 3 घंटे।
यह पूजा लगभग 3 घंटे की होती है, जिसे योग्य ब्राह्मण द्वारा कराया जाता है:
शुरुआत (पूर्वांग): संकल्प, गणेश-गौरी पूजन और कलश स्थापना।
मुख्य पूजन: अखंड सौभाग्य के लिए गौरी-शंकर पूजन, दोष निवारण के लिए नक्षत्र स्वामी की शांति, और स्वास्थ्य रक्षा के लिए महामृत्युंजय जप।
हवन: पलाश की समिधा (लकड़ी) से महामृत्युंजय मंत्रों द्वारा आहुति और पूर्णाहुति।
विशेष दान: पूजा के अंत में स्वर्ण-नाग, सोना, और गौ-दान (या गो-मूल्य द्रव्य) देकर ब्राह्मण दक्षिणा दी जाती है।