नाम-गोत्र सहित संकल्प, मंत्र, हवन और अभिषेक — पूर्ण शास्त्रोक्त वैदिक विधान से
प्रत्येक अनुष्ठान आपके नाम और गोत्र के संकल्प से आरंभ होता है। मंत्रोच्चार, हवन और अभिषेक शास्त्रोक्त क्रम में, आचार्यों के निर्देशन में संपन्न किए जाते हैं — विधि में कोई संक्षेप नहीं, कोई शिथिलता नहीं।



